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वंदना गीत- शीर्षक- माता सावित्रीबाई फुले
कविता- "धर्म और मजहब पागलपन है" -संतोष शाक्य
हमको फिर से मुकम्मल हिंद चाहिये- संतोष शाक्य
अब न कोई खंजर चलना चाहिये- कविता- संतोष शाक्य
कोरोना संकट में मजदूर की व्यथा- संतोष शाक्य
हां मैं पाकिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ हूं- संतोष शाक्य
जंग के मैदान बन गए हैं नगर- संतोष शाक्य
अपने इतिहास को पढ़कर देखो- संतोष शाक्य
हमको फिर से मुकम्मल हिंद चाहिए- संतोष शाक्य
फांसी खाते किसान की व्यथा- संतोष शाक्य
जब से सीखा हिंदू मुसलमां होना- संतोष शाक्य
आसान नहीं है बुद्ध हो जाना - संतोष शाक्य
बहरा है सिंहासन तेजी में बोलो- संतोष शाक्य
 मनुस्मृति का काला सच
बुद्ध तुम्हे प्रेम का संसार दे गए
अत्याचार मिटाने को बन्दूक उठानी पड़ती है